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4 मई 2026 • 8 मिनट पढ़ें

चातुर्मास 2026 में शादी क्यों नहीं होती - शुरू और खत्म कब?

कुंडलीमिलान संपादकीय टीम

अंतिम अपडेट: 4 मई 2026

त्वरित उत्तर

चातुर्मास 2026, देवशयनी एकादशी - 6 जुलाई 2026 से शुरू होता है। इस दिन से विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और पारंपरिक हिंदू विवाह 4 महीने के लिए रुक जाते हैं। 2026 में विवाह के लिए आखिरी शुभ मुहूर्त 26 जून 2026 है। चातुर्मास लगभग 1 नवंबर 2026 (देव उठनी एकादशी) को समाप्त होता है।

देवशयनी एकादशी क्या है - और शादी से इसका संबंध क्यों?

“देवशयनी” शब्द दो संस्कृत शब्दों से बना है: “देव” और “शयन”। देव का अर्थ दिव्य या ईश्वर, और शयन का अर्थ सोना या विश्राम है। देवशयनी एकादशी वह दिन है जब विष्णु भगवान आषाढ़ शुक्ल एकादशी को योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं। यह कोई लोक कथा नहीं है। धर्मशास्त्र और पुराणों में इसका विस्तृत वर्णन मिलता है।

परंपरा के अनुसार, जब विष्णु सो रहे होते हैं, तब मांगलिक कार्यों - विशेष रूप से विवाह - के लिए दिव्य अनुमति नहीं मिलती। विवाह केवल सामाजिक आयोजन नहीं माना जाता, बल्कि संस्कार माना जाता है। इसलिए चातुर्मास काल में विवाह रोक दिया जाता है। यही कारण है कि 6 जुलाई 2026 के बाद शादी की तारीखें सामान्यतः नहीं दी जातीं।

यह नियम बंगाल से गुजरात और राजस्थान से तमिलनाडु तक पूरे भारत में व्यापक रूप से माना जाता है, हालांकि क्षेत्रीय भिन्नताएँ भी हैं। अगर आप जुलाई से पहले विकल्प देख रहे हैं, तो मई 2026 के शुभ मुहूर्त देखें और साथ में कुंडली मिलान भी कर लें। केवल तारीख काफी नहीं होती।

2026 की सटीक तारीखें

चातुर्मास शुरू

देवशयनी एकादशी

6 जुलाई 2026

चातुर्मास समाप्त

देव उठनी एकादशी (±1 दिन - स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें)

~1 नवंबर 2026

चातुर्मास से पहले आखिरी मुहूर्त

हस्त नक्षत्र, शुक्रवार, शुक्र अस्त समाप्त

26 जून 2026

व्यवहारिक बात सीधी है। अगर आपका परिवार पारंपरिक हिंदू विवाह करना चाहता है, तो 26 जून 2026 को आखिरी मुहूर्त मानकर चलें। उसके बाद जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में सामान्य विवाह मुहूर्त नहीं मिलेंगे। इसीलिए जून 2026 मुहूर्त गाइड इस समय बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।

दूसरी बात, 26 जून आखिरी मुहूर्त है तो मांग अचानक बढ़ती है। वेन्यू, कैटरिंग, फोटो और पंडित - सब जल्दी भरते हैं। अगर जून भी छूट जाए, तो फिर पूरा 2026 कैलेंडर देखकर नवंबर के विकल्प तैयार रखें। अंग्रेज़ी में पढ़ना चाहें तो अंग्रेज़ी संस्करण भी उपलब्ध है।

अगर शादी जुलाई या अगस्त 2026 में बुक है तो क्या करें?

विकल्प एक: शादी को जून 2026 में ले आएं। 26 जून 2026 - हस्त नक्षत्र, शुक्रवार - आखिरी शुभ मुहूर्त है। तारीख पास है। इसलिए वेन्यू बुकिंग, परिवार समन्वय और कुंडली मिलान अभी करना होगा। देर की तो यह विंडो भी निकल सकती है।

विकल्प दो: नवंबर 2026 तक प्रतीक्षा करें। देव उठनी एकादशी (~1 नवंबर) के बाद विवाह सीजन फिर खुलता है। 4, 8, 12, 15 नवंबर - पहले प्रमुख मुहूर्त हैं। 22 नवंबर भी अच्छा विकल्प माना जा रहा है। कई परिवार इसी कारण पहले से नवंबर बुक करते हैं, क्योंकि यह उच्च माँग का महीना होता है।

क्षेत्रीय भिन्नता - क्या सबके लिए एक ही नियम है?

नहीं। दक्षिण भारत की कुछ वैष्णव परंपराएँ - विशेषकर तमिलनाडु और कर्नाटक के कुछ समुदाय - अपने अलग पंचांग का पालन करती हैं, इसलिए उनके लिए प्रतिबंध काल थोड़ा भिन्न हो सकता है। यदि आपका परिवार दक्षिण भारतीय या किसी विशेष संप्रदाय की परंपरा का पालन करता है, तो अपने कुल पुरोहित से पूछें। उत्तर भारत के नियम को हर जगह का अंतिम नियम न मानें।

नवंबर 2026 - चातुर्मास के बाद पहले मुहूर्त

देव उठनी एकादशी (~1 नवंबर 2026) के बाद पहले शुभ विवाह मुहूर्त 4, 8, 12, 15, और 22 नवंबर को हैं। यही वह समय है जब विवाह बाजार फिर खुलता है। जो परिवार 26 जून की आखिरी विंडो चूक जाते हैं, वे सब नवंबर की ओर आते हैं। इसलिए वेन्यू जल्दी बुक करें।

26 जून से पहले कुंडली मिलान करें

सही मुहूर्त + मजबूत कुंडली मिलान - दोनों मिलकर विवाह को सफल बनाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चातुर्मास 2026 में शादी क्यों नहीं होती?

देवशयनी एकादशी (6 जुलाई) से विष्णु योगनिद्रा में जाते हैं। मांगलिक कार्यों के लिए दिव्य अनुमति नहीं मिलती — इसीलिए परंपरा में विवाह वर्जित है।

2026 में चातुर्मास कब शुरू होगा?

6 जुलाई 2026, देवशयनी एकादशी। यह तारीख लगभग सारे उत्तर भारत में एक जैसी है।

जुलाई 2026 में शादी हो सकती है?

पारंपरिक हिंदू मत में नहीं — 6 जुलाई से चातुर्मास शुरू हो जाता है। 26 जून आखिरी शुभ तारीख है।

अगर शादी अगस्त में बुक है तो क्या करें?

दो विकल्प: जून 26 में लाएं (जल्दी करना होगा), या नवंबर 2026 में ले जाएं (देव उठनी एकादशी के बाद)।

चातुर्मास 2026 कब खत्म होगा?

लगभग 1 नवंबर 2026, देव उठनी एकादशी। स्थानीय पंचांग से ±1 दिन की भिन्नता संभव है।

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